यह 10 ख्वाबों के मंजर से भरे हुए शायरीया

रू-ब-रू आते हैं वो माजी के आईने की तरह... हुस्न पर्दे से निकलकर निगाहों पे छा जाती है... उसके जलवों के आगोश में सांसें तो क्या... धड़कनों की रफ्तार भी बढ़ सी जाती है...

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रू-ब-रू आते हैं वो माजी के आईने की तरह…
हुस्न पर्दे से निकलकर निगाहों पे छा जाती है…
उसके जलवों के आगोश में सांसें तो क्या…
धड़कनों की रफ्तार भी बढ़ सी जाती है…

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मेरे ख्वाबों के उजड़े हुए से मंजर में
अश्कों से लिखे गए कुछ नगमें हैं
जिन लम्हों ने दिए हैं ये जख्म के टुकड़े
उन टुकड़ों में बस तेरी ही परछाई है