पढ़िए ग़ालिब के ये 10 ज़बरदस्त शायरियां

इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया, दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया। आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद, मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।

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इश्क से तबियत ने जीस्त का मजा पाया,

दर्द की दवा पाई दर्द बे-दवा पाया।

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आता है दाग-ए-हसरत-ए-दिल का शुमार याद,

मुझसे मेरे गुनाह का हिसाब ऐ खुदा न माँग।

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