इंतज़ार के तन्हाईयों में ये 10 शायरियां पढ़े

यकीन ही उठ गया, इस राह को अब... तो छोड़ दे ग़ालिब... मगर ..…इश्क में रिवाज हो गया कि... इन्तजार कयामत तक होता है …..

1.

हमने तो उस शहर में भी किया है इंतज़ार तेरा,
जहाँ मोहब्बत का कोई रिवाज़ न था..

2.

इशक के दरद ही कुछ ऐसे हैं…
लोग जान दे देते हैं मगर इंतजार नहीं करते।।