दर्द बर्दाश्त न होपाए ऐसी ये 10 शायरियां पढ़े

खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो... आइना देख लो अहबाब से पूछा न करो... शेर अच्छे भी कहो, सच भी कहो, कम भी कहो... दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुसवा न करो...

1.

कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता,
हमारी हालत तुम्हारी होती,
जो रात हमने गुज़ारी तड़प कर,
वो रात तुमने गुज़ारी होती।

2.

बिखरे अरमान, भीगी पलकें और ये तन्हाई,
कहूँ कैसे कि मिला मोहब्बत में कुछ भी नहीं।